रूस ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को रोकने में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। रूस का मानना है कि भारत मध्यस्थता करके इस युद्ध को समाप्त करने में मदद कर सकता है।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, जिसके कारण विश्वभर में गंभीर ईंधन संकट गहरा गया है। इस परिस्थिति में रूस ने भारत की मध्यस्थता स्वीकारने की अपील की है।
रूस के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़खारोवा ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के कारण उत्पन्न संकट को रोकने के लिए भारत जैसी प्रभावशाली शक्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत ने भी शुरुआत से ही इस युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत का मार्ग अपनाने पर जोर दिया है।
इजरायली सेना ने ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड 'साउथ पार्स' पर हमला किया, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल आया है। क्रूड ऑयल की कीमत 6.3% बढ़कर 109.95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि यूरोप में गैस के भाव में 9.3% की तेजी देखी गई है। इससे पहले ईरान के तेल भंडार वाले खारग द्वीप को भी निशाना बनाया गया था।
भारत के लिए यह संघर्ष चिंता का विषय है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% क्रूड ऑयल और 60% एलपीजी आयात करता है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी होने से खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति बाधित हुई है। हालांकि, भारत ने रूस से तेल मंगवाकर इस कमी को आंशिक रूप से पूरा किया है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, रूस ईरान को सैटेलाइट डेटा और ड्रोन टेक्नोलॉजी के जरिए मदद कर रहा है, जिससे यह युद्ध और गंभीर हो सकता है।