ऊर्जा की कीमतों और मुद्रास्फीति की आशंकाओं के बढ़ने के साथ ही फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें तेजी से कम हो रही हैं।
बाजार के जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक निकट भविष्य में ब्याज दरों में कोई राहत नहीं देगा। तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह बदलाव आया है।
पहले, बाजार को उम्मीद थी कि जून में ब्याज दरों में 0.25% की कटौती हो सकती है, और फिर सितंबर में एक और कटौती संभव थी। लेकिन ताजा घटनाक्रमों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
शुरुआत में, नरम श्रम बाजार, मुद्रास्फीति में कमी और एक नए नीति-निर्माता के आने से फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें कम करने का दबाव बढ़ने की उम्मीद थी। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना प्राथमिकता बनी हुई है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि उच्च मुद्रास्फीति के कारण फेडरल रिजर्व के लिए जल्द ही ब्याज दरें कम करना मुश्किल होगा।
हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का यह भी मानना है कि यदि श्रम बाजार में जल्दी और अधिक गिरावट आती है, तो तेल की कीमतों में वृद्धि का मुद्रास्फीति पर प्रभाव कम होगा और फेडरल रिजर्व ब्याज दरें कम करने पर विचार कर सकता है।
फेड फंड्स फ्यूचर्स बाजार में कारोबारियों ने सितंबर में भी कटौती की संभावना को खारिज कर दिया है और अब उन्हें केवल दिसंबर में एक कटौती की उम्मीद है।
2027 या 2028 की शुरुआत तक कोई और कटौती की उम्मीद नहीं है।
यह परिदृश्य मध्य पूर्व की स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि स्थिति में सुधार होता है, तो बाजारों में सामान्य स्थिति बहाल हो सकती है और ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीदें बढ़ सकती हैं।
इस बीच, कुछ लोगों का मानना है कि फेडरल रिजर्व को तुरंत ब्याज दरें कम करनी चाहिए।
आने वाले दिनों में जारी होने वाले मुद्रास्फीति के आंकड़े फेडरल रिजर्व के फैसलों को प्रभावित करेंगे।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में मुद्रास्फीति स्थिर हो रही है, लेकिन यह अभी भी फेडरल रिजर्व के 2% के लक्ष्य से ऊपर है।
उनका यह भी मानना है कि फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें कम करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी अगली बैठक में ब्याज दरों पर फैसला करेगी।