खुफिया एजेंसी FBI पर एक बार फिर अमेरिकियों के लोकेशन डेटा को खरीदने का आरोप लगा है। आरोप है कि FBI बिना वारंट के ही लोगों का लोकेशन डेटा खरीद रही है।
सीनेट की एक समिति के सामने पेश हुए FBI के डायरेक्टर कश पटेल ने स्वीकार किया कि एजेंसी 'व्यावसायिक रूप से उपलब्ध सूचना' खरीदती है, और इससे उन्हें 'महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी' मिली है। हालाँकि, उन्होंने इस प्रथा को रोकने का वादा नहीं किया।
इस खुलासे के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह नागरिकों की निजता का उल्लंघन है और यह संविधान के चौथे संशोधन का उल्लंघन है, जो अनुचित खोज और जब्ती से सुरक्षा प्रदान करता है।
सीनेटर रॉन वायडेन ने FBI के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि बिना वारंट के लोकेशन डेटा खरीदना 'चौथे संशोधन का घोर उल्लंघन' है। उन्होंने कांग्रेस से 'सरकारी निगरानी सुधार अधिनियम' पारित करने का आग्रह किया, जो संघीय सरकार को वारंट के बिना अमेरिकियों के लोकेशन डेटा को खरीदने से रोकेगा।
हालांकि, कुछ लोग FBI के इस कदम का बचाव कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह आतंकवाद और अपराध से लड़ने के लिए आवश्यक है। सीनेटर टॉम कॉटन ने कहा कि लोकेशन डेटा खरीदना 'कचरा छानने' जैसा है और अगर इससे 'दुष्ट बाल यौन शोषण करने वालों' या 'बर्बर कार्टेल नेताओं' का पता लगाने में मदद मिलती है, तो FBI को ऐसा करना चाहिए।
यह मामला FBI और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा नागरिकों की निगरानी की सीमा पर बहस को फिर से खोलता है। जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, सरकार के लिए नागरिकों की निजता की रक्षा करना और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना एक चुनौती बनती जा रही है।