गुजरात सरकार राज्य में साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने और निर्दिष्ट क्षेत्रों में संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 1991 के 'अशांत क्षेत्र संपत्ति हस्तांतरण प्रतिबंध अधिनियम' में महत्वपूर्ण संशोधन करने जा रही है। इस संबंध में संशोधन विधेयक जल्द ही विधानसभा में पेश किया जाएगा, जिसका आधिकारिक मसौदा जारी कर दिया गया है।
कानून में संशोधन की आवश्यकता क्यों?
वर्तमान कानून के लागू होने के बावजूद, ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि अशांत क्षेत्रों में कुछ संपत्तियां अवैध रूप से कब्जा की जा रही हैं या दबाव में बेची जा रही हैं। इन कमियों को दूर करने और कानून को और सख्त बनाने के लिए सरकार यह कदम उठा रही है।
नए विधेयक के मुख्य प्रावधान
•अशांत क्षेत्रों में स्थित जगहों से किरायेदारों को जबरन बेदखल करने से बचाने वाले प्रावधानों को और मजबूत किया जाएगा।
•साम्प्रदायिक तनाव के कारण किसी विशेष समुदाय के लोगों को डर या दबाव में अपना घर छोड़कर कहीं और पलायन न करना पड़े, इसके लिए 'निर्दिष्ट क्षेत्र' घोषित करने की शक्ति और प्रावधान जोड़े गए हैं।
•अब से अशांत क्षेत्र में संपत्ति के हस्तांतरण की अनुमति देने से पहले कलेक्टर को न केवल दस्तावेजों की जांच करनी होगी, बल्कि उस क्षेत्र की साम्प्रदायिक स्थिति और सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन की संभावनाओं की भी गहन जांच करनी होगी।
जांच प्रक्रिया में परिवर्तन
नए मसौदे के अनुसार, संपत्ति बिक्री के आवेदन पर निर्णय लेते समय कलेक्टर को इस बात पर विचार करना होगा कि क्या इस बिक्री से उस क्षेत्र में रहने वाले विभिन्न समुदायों के बीच साम्प्रदायिक तनाव बढ़ सकता है? क्या इस हस्तांतरण से सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) खतरे में पड़ने की कोई संभावना है? क्या विक्रेता व्यक्ति किसी भी प्रकार के अनुचित दबाव में यह निर्णय ले रहा है? इस संशोधन के द्वारा सरकार का उद्देश्य असामाजिक तत्वों द्वारा संपत्तियों को हड़पने की गतिविधियों को रोकना और अशांत क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना को बनाए रखना है।