IEA रिपोर्ट: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और तेल-गैस भंडारों पर हमलों के बीच, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने दुनिया को बड़ी चेतावनी दी है। IEA के अनुसार, अब केवल तेल की आपूर्ति बढ़ाने से इस संकट का समाधान नहीं होगा, बल्कि दुनिया को अपनी आदतें बदलकर खपत कम करने पर ध्यान देना होगा।
आपूर्ति का अब तक का सबसे बड़ा झटका: तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए एजेंसी ने हाल ही में 40 करोड़ बैरल तेल का जत्था बाजार में उतारा था, जो उसके इतिहास का सबसे बड़ा कदम था। फिर भी, IEA का मानना है कि यह सिर्फ सामान्य तेल संकट नहीं है, बल्कि अब तक का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक है। रिपोर्ट के अनुसार, विश्व का 20% तेल आपूर्ति जिस मार्ग से गुजरता है, वह लगभग बंद हो गया है, जिसके कारण प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल तेल के प्रवाह में अचानक गिरावट आई है।
महंगाई पर सीधा असर: तेल की कीमतें प्रति बैरल 100 डॉलर को पार कर गई हैं और डीजल, जेट फ्यूल और एलपीजी जैसी वस्तुएं तेजी से महंगी हो रही हैं। IEA के प्रमुख फतेह बिरोल ने स्पष्ट किया है कि अगर स्थिति जल्दी नहीं सुधरती है तो इस ऊर्जा आपदा का असर और घातक और गहरा होगा।
IEA ने दी ये सलाह: केवल आपूर्ति बढ़ाने के बजाय मांग घटाने के लिए एजेंसी ने कई तत्काल समाधान सुझाए हैं, जिनमें वर्क फ्रॉम होम अपनाना और हाईवे पर वाहनों की स्पीड 10 किमी प्रति घंटा कम करना शामिल है। इसके अलावा, सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम उपयोग करना, कार शेयरिंग और बेहतर ड्राइविंग पद्धतियां अपनाना, तथा केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही हवाई यात्रा करने पर जोर दिया गया है। वाहनों में एलपीजी का उपयोग बंद करना और रसोई में गैस के बजाय इलेक्ट्रिक स्टोव या चूल्हे का उपयोग करना भी जरूरी है। एजेंसी ने जोर देकर कहा है कि अब इस संकट से बाहर आने के लिए दुनिया के पास तेल और गैस पर निर्भरता कम करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।