ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में एक नया मोड़ आया है जिसने वैश्विक टेक्नोलॉजी और मेडिकल इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। ईरान ने कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट 'रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी' पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। यह प्लांट दुनिया का सबसे बड़ा LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) प्लांट है। हमले से प्लांट में भीषण आग लग गई है और भारी नुकसान हुआ है। कतर एनर्जी के सीईओ के अनुसार, प्लांट वर्तमान में केवल 17% क्षमता पर काम कर रहा है और इसे पूरी तरह से ठीक होने में 3 से 5 साल लग सकते हैं।
हीलियम गैस का संकट: विश्व स्तर पर हाहाकार
इस हमले का सबसे गंभीर प्रभाव हीलियम गैस के उत्पादन पर पड़ा है। कतर दुनिया के कुल हीलियम आपूर्ति का 33% हिस्सा प्रदान करता था, जो अब रातोंरात बंद हो गया है। हीलियम एक अत्यंत हल्का और ठंडा गैस है, जो सेमीकंडक्टर (चिप) कारखानों में मशीनों को ठंडा रखने, अस्पतालों में MRI मशीनों के लिए और रॉकेट ईंधन में अनिवार्य है। हीलियम का कोई सस्ता विकल्प नहीं होने के कारण इसकी कीमतें पहले से ही दोगुनी हो गई हैं और दुनिया के कई देशों में इसकी कमी होने लगी है।
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भारत सहित 12 देशों पर सीधा असर
इस संकट से दुनिया के 12 बड़े देश सीधे प्रभावित हुए हैं। दक्षिण कोरिया, जो अपनी 64.7% जरूरत कतर से पूरी करता है, वहां सैमसंग जैसी चिप फैक्ट्रियों पर खतरा मंडरा रहा है। ताइवान, जापान और सिंगापुर जैसे टेक हब में भी दहशत का माहौल है। भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि अस्पतालों में MRI स्कैन के लिए आवश्यक हीलियम कतर से आता है, जिसके कारण अब स्कैन महंगे हो रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में भी हीलियम की राशनिंग शुरू हो गई है और लैपटॉप, स्मार्टफोन और कारों की कीमतों में 15-20% की वृद्धि की चेतावनी दी गई है।