पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सैन्य ठिकानों पर हमलों के बाद, ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) को निशाना बनाया जा रहा है।
ईरान ने अपने साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुए इजरायली हमले का बदला लेने के लिए कतर के महत्वपूर्ण 'रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी' पर हमला किया है। इस हमले के बाद कतर के लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) प्लांट में भीषण आग लग गई है। कतर एनर्जी को उत्पादन रोकने पर मजबूर होना पड़ा है। ईरान ने सऊदी अरब और यूएई को भी अमेरिका-इजरायल का साथ देने पर तेल और गैस भंडारों पर हमले की चेतावनी दी है।
इस युद्ध का भारत पर सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 47% गैस कतर से आयात करता है। भारत हर साल लगभग 27 मिलियन टन LNG आयात करता है, जिसमें से 12-13 मिलियन टन कतर से आता है। कतर गैस हब पर हमले से वैश्विक बाजार में गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ सकते हैं।
भारत के लिए दूसरी बड़ी मुश्किल 'होर्मुज स्ट्रेट' में बढ़ता तनाव है। इस समुद्री मार्ग के बंद होने से भारत के कई गैस टैंकर समुद्र में फंसे हुए हैं। भारत सरकार ईरान से बातचीत करके जहाजों को सुरक्षित वापस लाने का प्रयास कर रही है। सरकार ने देश में गैस की कमी नहीं होने का आश्वासन दिया है, लेकिन अगर ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष लंबा चला और कतर जैसी ऊर्जा सुविधाएं लंबे समय तक बंद रहीं, तो भारत को अन्य देशों से महंगा गैस खरीदना पड़ सकता है। पश्चिम एशिया की अशांति वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।