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ईरान युद्ध के बीच सोना और डॉलर भी नहीं, निवेशक किसे मान रहे हैं सबसे सुरक्षित?

Satish Patel
Satish Patel
21 March 2026, 12:34 AM · 1 मिनट पढ़ें · 2 बार देखा गया
ईरान युद्ध के बीच सोना और डॉलर भी नहीं, निवेशक किसे मान रहे हैं सबसे सुरक्षित?

वैश्विक संकट में बिटकॉइन बना निवेशकों का नया ठिकाना: ईरान युद्ध के चलते वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारी अस्थिरता देखने को मिल रही है। तेल आपूर्ति की चिंता ने ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। इसका सीधा असर शेयर बाजारों और अन्य निवेश क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से पैसा निकालने लगते हैं। शेयर बाजारों में बिकवाली बढ़ जाती है और लोग ऐसी संपत्ति की तलाश करते हैं जिसे सुरक्षित माना जाए। आमतौर पर यह भूमिका सोना और अमेरिकी डॉलर निभाते आए हैं, लेकिन इस बार बाजार में एक अनोखा ट्रेंड देखने को मिल रहा है।

परंपरागत सुरक्षित संपत्ति: सोना और डॉलर

वैश्विक संकट या युद्ध की स्थिति में वर्षों से सोने को सबसे विश्वसनीय निवेश माना गया है, क्योंकि इसकी कीमत लंबे समय में स्थिर रहती है और केंद्रीय बैंक भी बड़े पैमाने पर सोने का भंडार रखते हैं। इसी तरह, अमेरिकी डॉलर भी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था का मुख्य आधार है। दुनिया का अधिकांश व्यापार और वित्तीय लेनदेन डॉलर में होता है। इसलिए संकट के समय निवेशक डॉलर की ओर रुख करते हैं। लेकिन हाल के ईरान संघर्ष में, एक दूसरी संपत्ति ने इन दोनों को पीछे छोड़ दिया है।

ईरान संघर्ष के समय बिटकॉइन में तेजी

28 फरवरी के बाद शुरू हुए संघर्ष के बाद बिटकॉइन की कीमत में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इसकी कीमत $72,000 से भी ऊपर पहुंच गई (एक समय तो $74,000 के करीब तक पहुंच गई थी)। इस दौरान बिटकॉइन की कीमत में लगभग 10% की वृद्धि दर्ज की गई। आश्चर्यजनक रूप से, इस वृद्धि ने सोना, अमेरिकी डॉलर और कई बड़े शेयर बाजार सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया।

क्यों निवेशक बिटकॉइन की ओर रुख कर रहे हैं?

कुछ वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं:

  1. सीमा रहित ट्रांसफर की क्षमता: बिटकॉइन एक डिजिटल संपत्ति है। इसे किसी भी देश से किसी भी देश में तुरंत ट्रांसफर किया जा सकता है, बिना बैंक या सरकार की सीधी भागीदारी के।
  2. पूंजी नियंत्रणों से मुक्ति: कुछ देशों में संकट के दौरान सरकारें धन की आवाजाही पर नियंत्रण लगा सकती हैं, लेकिन बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी इन सीमाओं को पार कर सकती है।
  3. 24/7 ट्रेडिंग: पारंपरिक बाजार दिन के एक निश्चित समय पर ही खुले रहते हैं, जबकि बिटकॉइन बाजार 24 घंटे और 7 दिन चलता है। इसलिए निवेशक वैश्विक घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
  4. संस्थागत निवेश में वृद्धि: हाल ही में बिटकॉइन से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में $1.1 बिलियन से अधिक का प्रवाह देखा गया है, जो दर्शाता है कि बड़े संस्थागत निवेशक भी अब क्रिप्टोकरेंसी पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

क्या बिटकॉइन वास्तव में 'सुरक्षित ठिकाना' है?

इस सवाल का जवाब कई विशेषज्ञ अलग-अलग तरीके से देते हैं, लेकिन कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बिटकॉइन अब धीरे-धीरे 'डिजिटल सुरक्षित ठिकाना' के रूप में उभर रहा है, क्योंकि:

  • इसे जब्त करना मुश्किल है।
  • यह बैंकिंग सिस्टम पर निर्भर नहीं है।
  • इसे वैश्विक स्तर पर तेजी से ट्रांसफर किया जा सकता है।

हालांकि, कई विशेषज्ञ अभी भी इसे एक जोखिम भरी संपत्ति मानते हैं। इसका एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि केंद्रीय बैंक बिटकॉइन को अपने रिजर्व के रूप में स्वीकार नहीं करते हैं, जबकि सोना आज भी बड़े पैमाने पर संग्रहित किया जाता है।

बिटकॉइन 'सुरक्षित ठिकाना' नहीं, 'शर्तों के साथ हेज'

पिछले वर्षों के आंकड़े भी दिलचस्प हैं। जब दुनिया में बड़े संकट आते हैं - जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष और कोविड-19 महामारी - तो क्रिप्टोकरेंसी बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ता हुआ देखा गया है। इसलिए कुछ विश्लेषक कहते हैं कि बिटकॉइन कभी-कभी 'सुरक्षित ठिकाना' नहीं, बल्कि 'शर्तों के साथ हेज' (conditional hedge) के रूप में काम करता है। शर्तों के साथ हेज एक ऐसी संपत्ति या निवेश उपकरण है जो हर समय नहीं, बल्कि कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में नुकसान से बचाता है।

सोने की कीमत क्यों स्थिर रही?

ईरान युद्ध के समय सोने में बहुत बड़ी तेजी नहीं देखी गई। इसके दो कारण हैं: पहला, मजबूत होता अमेरिकी डॉलर। डॉलर के मजबूत होने पर अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए सोना अधिक महंगा हो जाता है। इसलिए मांग घट जाती है। दूसरा कारण है महंगाई। युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ती हैं, जिससे महंगाई बढ़ती है। ऐसी स्थिति में, यदि ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना है, तो निवेशक सोने के बजाय अन्य निवेश विकल्प चुन सकते हैं।

वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बदलती मानसिकता

वर्तमान स्थिति एक महत्वपूर्ण संकेत देती है कि निवेशकों की मानसिकता बदल रही है। कुछ लोग अब 'सोने' जैसी पारंपरिक संपत्तियों के साथ डिजिटल संपत्तियों को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर रहे हैं। हालांकि, बिटकॉइन को अभी तक पूरी तरह से 'सुरक्षित ठिकाना' के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। इसकी कीमतों में अभी भी उच्च अस्थिरता रहती है। फिर भी, वैश्विक संकट के समय में यह निवेशकों के लिए एक विकल्प के रूप में उभर रहा है।

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