अमेरिका-ईरान युद्ध में भयंकर तबाही हो रही है। स्थिति ऐसी है कि ईरान के पड़ोसी देश भी युद्ध की चपेट में आ गए हैं। इज़राइल ने कल ईरान के सबसे बड़े तेल-गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया था, जिसके बाद ईरान ने भी कतर और संयुक्त अरब अमीरात के गैस प्लांटों पर हमला किया है। इस तबाही के बाद 12 अरब और इस्लामिक देशों ने रोष व्यक्त किया है और ईरान के हमलों की कड़ी शब्दों में निंदा की है। इन देशों ने ईरान को हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने को कहा है।
ईरान हमले रोके: 12 देशों का संयुक्त बयान
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में गुरुवार को इन 12 देशों की बैठक हुई। अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान को तत्काल हमले रोकने और अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करने के लिए कहा है।
ईरान पर रिहायशी इलाकों में हमला करने का आरोप
संयुक्त बयान में जॉर्डन, अजरबैजान और तुर्की ने ईरानी हमले की निंदा की है। विदेश मंत्रियों ने कहा कि ईरान ने रिहायशी इलाकों, ऑयल प्लांट, एयरपोर्ट, रिहायशी बिल्डिंगों और डिप्लोमेटिक स्थलों को टारगेट किया था।
कतर ने ईरानी राजनयिकों-अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया
कतर ने आरोप लगाया है कि ईरान ने रास लफ्फान औद्योगिक शहर को टारगेट किया है। कतर ने कहा कि ईरान द्वारा किए गए हमले संयुक्त राष्ट्र परिषद के प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन हैं। हमले के बाद कतर ने ईरानी दूतावास, सैन्य स्थलों, कार्यालयों को खाली करने और अपने स्टाफ को 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दे दिया है।
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