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मिजोरम में यूक्रेन के 6 नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद रूस का नाम उछला, भारत ने कहा- अब फैसला कोर्ट में!

Satish Patel
Satish Patel
21 March 2026, 12:35 AM · 1 मिनट पढ़ें · 10 बार देखा गया
मिजोरम में यूक्रेन के 6 नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद रूस का नाम उछला, भारत ने कहा- अब फैसला कोर्ट में!

एनआईए ने यूक्रेन के नागरिकों को किया गिरफ्तार: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मिजोरम में अवैध रूप से घुसने और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में 17 मार्च को यूक्रेन के 6 और अमेरिका के 1 नागरिक को गिरफ्तार किया था। इन संदिग्धों को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था। इस मामले में यूक्रेन ने गंभीर प्रतिक्रिया दी है और रूस की संलिप्तता का आरोप लगाया है। इन नागरिकों ने बिना किसी अनुमति के मिजोरम में प्रवेश किया था और उन पर गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप है।

रूस के निर्देश पर यूक्रेनियन नागरिकों की गिरफ्तारी: यूक्रेन का आरोप

भारत में यूक्रेन के छह नागरिकों की गिरफ्तारी का यूक्रेन ने विरोध किया है। यूक्रेन दूतावास ने एक्स पर एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि, ‘रूस के निर्देश पर भारत में यूक्रेन के छह नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। यूक्रेन किसी भी प्रकार के आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देता है। यूक्रेन हर दिन रूसी आतंकवाद का सामना कर रहा है। इस कारण हम सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के पक्ष में हैं।’

गिरफ्तारी का मामला सुनियोजित और राजनीतिक प्रेरित: यूक्रेन

यूक्रेन ने याद दिलाया है कि भारत और यूक्रेन सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने की प्रतिबद्धता दर्शा चुके हैं। प्रेस रिलीज में कहा गया है कि, ‘यूक्रेन के छह नागरिकों की गिरफ्तारी की सार्वजनिक सूचनाओं और मीडिया रिपोर्ट से ऐसे संकेत मिलते हैं कि रूस द्वारा भारत को दी गई जानकारी के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में भारत स्थित यूक्रेन दूतावास चिंतित है। खासकर वर्तमान परिस्थिति में हुई यह कार्रवाई संकेत देती है कि, गिरफ्तारी का मामला सुनियोजित और राजनीतिक प्रेरित है।’

वहां जाने की अनुमति लेनी अनिवार्य: भारत का यूक्रेन को जवाब

दूसरी तरफ इस मामले में भारत ने गुरुवार को प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा है कि, ‘इस इलाके में जाने के लिए अनुमति लेनी जरूरी है। उनके पास (यूक्रेनी नागरिकों) कोई विशेष अनुमति नहीं थी। अब इसका निर्णय कोर्ट करेगी। यह मामला कोर्ट में पेश किए जाने के बाद सच सामने आएगा। मैं कहना चाहता हूं कि, अगर इस मामले में NIA कोई बयान जारी करता है तो उसे देखें। मैं अभी इस केस की तकनीकी बातों को नहीं जानता। हालांकि मैं इतना समझता हूं कि, उस इलाके में जाने के लिए उनके पास कोई जरूरी दस्तावेज नहीं थे।’

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इस केस के मामले में विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय के कहने के अनुसार, मिजोरम में बिना अनुमति के रहने से यह मामला जुड़ा हुआ है। यह मामला कथित तौर पर अवैध तरीके से भारत और म्यांमार की सीमा पार करने से भी जुड़ा है। इससे पहले मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने विधानसभा में गंभीर जानकारी दी थी कि, अमेरिका और ब्रिटेन सहित विदेशी नागरिक मिजोरम से होकर म्यांमार जा रहे हैं। इन व्यक्तियों के आतंकवादियों को हथियार प्रशिक्षण देने में शामिल होने और उनमें से कुछ पहले रूस-यूक्रेन युद्ध में भी शामिल होने की खबरें मिली हैं।

ड्रोन सप्लाई और आतंकी प्रशिक्षण का नेटवर्क

उल्लेखनीय है कि, NIA की जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, ये आरोपी यूरोप से ड्रोन का बड़ा जत्था मंगवा रहे थे और म्यांमार के उन विद्रोही समूहों को सप्लाई करते थे जिन्हें भारतीय आतंकी संगठनों का समर्थन है। आरोपी मान्य वीजा पर भारत में प्रवेश कर गए थे, लेकिन मिजोरम जैसे संवेदनशील इलाकों के लिए जरूरी 'प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट' (RAP) हासिल नहीं की थी। यह सरहद पार करके म्यांमार में भारत विरोधी जातीय समूहों से मिले होने का भी खुलासा हुआ है। पटियाला हाउस कोर्ट ने इस षडयंत्र की गहराई, फंडिंग के स्रोत और विदेशी हैंडलर्स के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए आरोपियों की कस्टडी 27 मार्च तक बढ़ा दी है। एजेंसी फिलहाल आरोपियों के मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया अकाउंट्स स्कैन कर रही है ताकि भारत में छिपे उनके अन्य साथियों तक पहुंचा जा सके।

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