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राजनीति

मोटापा कम करने वाली दवाइयां होंगी सस्ती, जेनरिक दवा कंपनियों की एंट्री

Satish Patel
Satish Patel
19 March 2026, 09:21 PM · 1 मिनट पढ़ें · 1 बार देखा गया
मोटापा कम करने वाली दवाइयां होंगी सस्ती, जेनरिक दवा कंपनियों की एंट्री

मोटापा और डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए खुशखबरी है! अब बाजार में वजन घटाने वाली दवाइयां और भी सस्ती होने वाली हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि नोवो नोर्डिस्क (Novo Nordisk) की सेमाग्लूटाइड (semaglutide) दवा का पेटेंट इस सप्ताह खत्म हो रहा है, जिसके बाद कई जेनरिक दवा कंपनियां इस दवा को कम कीमत पर बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं।

माना जा रहा है कि इस कदम से भारत में जीएलपी-1 (GLP-1) दवाओं का बाजार तेजी से बढ़ेगा। अभी यह बाजार 4-5% है, जिसके अगले 12-18 महीनों में 15-20% तक पहुंचने की उम्मीद है। जेनरिक दवाएं सस्ती होंगी, इसलिए छोटे शहरों और कस्बों में भी लोगों तक पहुंचेंगी।

हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस बाजार में सफलता पाने के लिए दवा कंपनियों को कोल्ड-चेन (दवाओं को ठंडी जगह पर रखने की व्यवस्था), डिवाइस की गुणवत्ता और डॉक्टरों के साथ अच्छा नेटवर्क बनाए रखना होगा। यह भी अनुमान है कि कुछ ही बड़ी कंपनियां बाजार में अपनी पकड़ बना पाएंगी।

डॉक्टरों का कहना है कि जेनरिक दवाएं आने से मरीजों को फायदा तो होगा, लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन दवाओं का गलत इस्तेमाल न हो। इन दवाओं को सिर्फ डॉक्टर के पर्चे पर ही बेचा जाना चाहिए और कुछ खास डॉक्टरों को ही इसे लिखने की अनुमति होनी चाहिए।

अनुमान है कि जेनरिक दवाएं आने के बाद इन दवाओं को लिखने वाले डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ेगी, जिससे ज्यादा मरीजों तक इनका फायदा पहुंचेगा।

भारत में मोटापा कम करने वाली दवाओं का बाजार अभी 1,500 करोड़ रुपये का है, जिसके अगले 12-24 महीनों में 4,000-5,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। 2030 तक यह बाजार 8,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। जेनरिक दवा कंपनियां अपनी दवाओं को 3,000-5,000 रुपये के बीच में लॉन्च कर सकती हैं, जो कि असली दवा से काफी कम है।

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