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मध्य पूर्व युद्ध: ऊर्जा संकट गहराया, भारत समेत दुनिया पर खतरा!

Satish Patel
Satish Patel
19 March 2026, 06:40 PM · 1 मिनट पढ़ें · 2 बार देखा गया
मध्य पूर्व युद्ध: ऊर्जा संकट गहराया, भारत समेत दुनिया पर खतरा!

US इजरायल ईरान युद्ध: मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध को 20 दिन हो चुके हैं। मिलिट्री बेस और नेताओं पर हमलों के साथ शुरू हुए इस युद्ध में अब टारगेट बदल गए हैं और एनर्जी फील्ड मुख्य निशाने बन गए हैं। अब युद्ध में ऑयल और गैस के कुएं 'प्राइम टारगेट' बन गए हैं। पहले ईरान के खर्ग द्वीप पर हमला और अब साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुआ बड़ा हमला दिखाता है कि अमेरिका और इजरायल ईरान को आर्थिक रूप से पंगु बनाने की दिशा में कदम उठा चुके हैं। जवाबी कार्रवाई में अब ईरान भी एनर्जी साइट्स को निशाना बना रहा है। जानिए कैसे यह युद्ध अब दुनिया के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर सकता है।

पॉवर स्ट्रक्चर पर हमला, दुनिया पर संकट की आहट

ईरान के साथ युद्ध में सबसे पहले पॉवर स्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित किया गया और सीधे सैन्य ठिकानों और नेताओं को निशाना बनाया गया। इसके बाद युद्ध का विस्तार समुद्र तक पहुंचा, जहां टॉरपीडो हमलों और जहाजों को उड़ाने की घटनाओं से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जैसे रास्ते असुरक्षित हो गए। लेकिन, अब यह संघर्ष एक खतरनाक मोड़ ले चुका है, जहां सीधे देशों की 'एनर्जी लाइफलाइन' पर हमले हो रहे हैं। यानी जंग अब सिर्फ सैन्य ताकत की नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर नुकसान पहुंचाने की हो रही है, जिसका असर विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इजरायल द्वारा साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने कतर की एलएनजी गैस फैसिलिटी को निशाना बनाया था। इससे पहले भी 7-8 मार्च की रात इजरायल ने तेहरान के ऑयल डिपो पर एयरस्ट्राइक की थी। शहरान ऑयल डिपो और करज में भी भारी तबाही हुई थी।

किस एनर्जी फील्ड पर कब और किसने किया हमला?

1. खर्ग द्वीप (ईरान) - अमेरिका का हमला

इस युद्ध में खर्ग द्वीप पर हमले से ही एनर्जी फील्ड पर अटैक का सिलसिला शुरू हुआ था। शनिवार को ईरान की लाइफलाइन माने जाने वाले खर्ग द्वीप पर अमेरिका ने हमला किया था। यह द्वीप ईरान के तट से लगभग 30 किलोमीटर दूर है और यहां से देश का लगभग 90% कच्चा तेल एक्सपोर्ट होता है। डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक करेगा, तो इस द्वीप के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा।

2. साउथ पार्स गैस फील्ड (ईरान) - इजरायल का हमला

इसके बाद इजरायल द्वारा ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स को निशाना बनाया गया था। यह फील्ड कतर के नॉर्थ डोम के साथ मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार है। ईरान की लगभग 70 प्रतिशत घरेलू गैस सप्लाई यहीं से आती है। हमले के बाद यहां भीषण आग लग गई थी, जिसकी पुष्टि ईरानी सरकारी टीवी ने की थी। इस हमले की कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों ने आलोचना की है, क्योंकि इसके बाद उनके एनर्जी ठिकानों पर भी लगातार हमले हो रहे हैं।

ट्रम्प ने हाथ ऊंचे कर दिए

लेकिन इस हमले के बारे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह हमला इजरायल ने किया है और अमेरिका को इसकी जानकारी नहीं थी। साथ ही अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान कतर पर हमला करेगा तो वे ईरान के साउथ पार्स को तबाह कर देंगे।

3. रास लाफान (कतर) - ईरान का हमला

इजरायल के हमले का जवाब देते हुए ईरान ने कतर के रास लाफान को निशाना बनाया। यह दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी हब है। जंग शुरू होने के बाद यहां ईरान की ओर से बार-बार हमले किए गए हैं। यहां बड़ा नुकसान होने और कई प्लांट्स प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। आज गुरुवार सुबह यहां कई जगहों पर भीषण आग लग गई। कतर दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार ईरान के साथ साझा करता है और कतर एनर्जी की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व का लगभग 10% गैस रिजर्व कतर के पास है। कतर ने भारत और फ्रांस सहित देशों के साथ एलएनजी करार किया है।

4. रुवैस रिफाइनरी (अबू धाबी) - ईरान का हमला

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में अबू धाबी में स्थित रुवैस रिफाइनरी को निशाना बनाया है, जो दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी है। इस महीने की शुरुआत में ड्रोन हमले के बाद सावधानी के तौर पर यहां काम रोक दिया गया था। हालांकि रिफाइनरी को सीधा नुकसान हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है और संचालन करने वाली कंपनी ADNOC ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

5. रास तनुरा (सऊदी अरब) - ईरान का हमला

रास तनुरा रिफाइनरी सऊदी अरब में है और यह मध्य पूर्व की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है। जिसकी क्षमता प्रतिदिन 5.5 लाख बैरल की है। युद्ध के दौरान इस पर भी कई बार हमले हुए हैं, जिसमें ड्रोन अटैक के बाद लगी आग के कारण काम आंशिक रूप से बंद करना पड़ा था।

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इन सभी हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा गया है। अमेरिका-इजरायल ने ईरान के साथ शुरू किया युद्ध पहले से ही 14 देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। अब न तो समुद्री मार्ग सुरक्षित रहे हैं न तो जमीन और न ही ऑयल भंडार, सभी चीजें अब युद्ध की चपेट में आ गई हैं। जिससे भारत जैसे देश जो क्रूड और गैस के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं, उनके लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण और मुश्किल साबित हो सकता है। जाहिर तौर पर मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध का परिणाम न सिर्फ वहां के देश चुका रहे हैं बल्कि एनर्जी सेक्टर पर हुए हमलों के बाद इस युद्ध की आग की चपेट में भारत समेत पूरी दुनिया आ जाएगी।

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