सरकार ने नए और सरलीकृत आयकर अधिनियम को लागू करने के लिए नियमों को अधिसूचित कर दिया है। ये नियम 1 अप्रैल से प्रभावी हो गए हैं।
इन नियमों में करदाताओं को राहत देने के साथ-साथ अनुपालन को भी कड़ा किया गया है।
आठ प्रमुख शहरों - मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु में मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance) की सीमा को बढ़ाकर वेतन का 50% कर दिया गया है। हालांकि, इसके लिए मकान मालिक और किरायेदार के बीच संबंध का खुलासा करना अनिवार्य कर दिया गया है।
नए नियमों में अनुलाभ (Perquisite benefits) को भी बढ़ाया गया है। भोजन कूपन और नियोक्ता द्वारा प्रदान की जाने वाली कारों जैसी छूटों को नई कर व्यवस्था में भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही, नियोक्ता द्वारा प्रदान की जाने वाली मोटर कारों के लिए रियायती मूल्यांकन स्लैब के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
वेतनभोगी करदाताओं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors) और सीमा पार संस्थाओं के लिए प्रकटीकरण आवश्यकताओं को कड़ा किया गया है। लेखा परीक्षकों और कंपनियों पर अधिक जिम्मेदारी डाली गई है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप एक अधिक अनुपालन-संचालित व्यवस्था की ओर बदलाव का संकेत देता है।
एक महत्वपूर्ण बदलाव में, नियमों ने उचित बाजार मूल्यांकन और ट्रांसफर प्राइसिंग (Transfer Pricing) जैसे जटिल प्रमाणन करने वाले पेशेवरों के लिए "कठोर सीमाएं" पेश की हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (Chartered Accountants) के पास अब कम से कम 10 साल का अनुभव होना चाहिए, जिसमें व्यक्तियों के लिए न्यूनतम वार्षिक रसीदें ₹50 लाख और फर्मों के लिए ₹3 करोड़ होनी चाहिए।
स्रोत पर कर कटौती (Tax Deducted at Source) और एकत्रित कर सुधार विवरण दाखिल करने की समय सीमा को छह साल से घटाकर दो साल कर दिया गया है, जो तेजी से प्रसंस्करण और लगभग वास्तविक समय के अनुपालन पर जोर देता है।