पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर भारत की एक बड़ी बीयर कंपनी पर पड़ सकता है। गर्मियों की शुरुआत के साथ ही कंपनी को लागत बढ़ने की आशंका है, जिससे मुनाफे में कमी आ सकती है।
दो कमजोर तिमाहियों के बाद, मांग में सुधार हो रहा है, लेकिन पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण कच्चे माल की लागत बढ़ने से लाभ पर दबाव पड़ सकता है।
कंपनी के अनुसार, बीयर की कीमतों का निर्धारण राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है, जिसके कारण कच्चे माल की लागत बढ़ने पर कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ता है। बोतल और ढुलाई की लागत में वृद्धि से कंपनी की लागत 5-6% तक बढ़ सकती है।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में नीतिगत बदलावों के कारण वृद्धि देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में अब देशी और विदेशी शराब की दुकानों पर बीयर बेचने की अनुमति है, जिससे खुदरा लाइसेंस की संख्या दोगुनी हो गई है।
कंपनी प्रीमियम श्रेणी में नए उत्पादों को लॉन्च करने की उम्मीद कर रही है। जनवरी में, कंपनी ने कुछ राज्यों में किंगफिशर स्मूथ लॉन्च किया था।
कंपनी लागत को कम करने के लिए स्थानीय उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी तेलंगाना में एक नई कैन लाइन और महाराष्ट्र में अतिरिक्त निवेश कर रही है।
कंपनी को उम्मीद है कि बीयर बाजार आने वाले महीनों में 6-7% बढ़ेगा और कंपनी का लक्ष्य उस वृद्धि को पार करना है। हालांकि, कंपनी का ध्यान लागत को संतुलित करने पर रहेगा।