बिहार में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में एनडीए की जीत के बाद, विपक्षी महागठबंधन में दरार बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। इस चुनाव में कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक अनुपस्थित रहे, जिसके बाद से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
विपक्षी गठबंधन ने राजद उम्मीदवार को मैदान में उतारकर मुकाबले को अनिवार्य बना दिया था, लेकिन वे एक भी सीट जीतने में विफल रहे। चुनाव परिणाम 16 मार्च को घोषित किए गए थे।
कांग्रेस के तीन विधायक और राजद के एक विधायक अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए मतदान से अनुपस्थित रहे। इसके बाद, कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने तीनों अनुपस्थित विधायकों को नोटिस जारी किया, लेकिन राजद ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
जदयू और भाजपा के नेताओं ने राजद पर अपने विधायक के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बनाया है। वहीं, कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने पार्टी नेतृत्व की कमजोर संचार प्रणाली को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजद अपने विधायक के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम नहीं हो सकता है, क्योंकि विधायकों की संख्या में मामूली गिरावट भी उन्हें विपक्ष के नेता के पद से वंचित कर सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है और विपक्षी एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।