सुरत में गैस संकट: मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब सूरत शहर में भी दिखने लगा है। रसोई गैस की आपूर्ति पर असर पड़ने से शहर में रहने वाले हजारों प्रवासी श्रमिकों का दैनिक जीवन मुश्किल हो गया है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है, जिसके कारण कई श्रमिकों ने आखिरकार अपने वतन की राह पकड़ ली है।
कालाबाजारी के भाव चुकाना संभव नहीं:
सूरत जैसे महानगर की विभिन्न उद्योगों की रीढ़ की हड्डी प्रवासी श्रमिक ही हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित राज्यों से आए ये श्रमिक शहर के टेक्सटाइल, निर्माण सहित उद्योगों में मेहनत करते हैं। लेकिन पिछले पंद्रह दिनों से गैस की गंभीर कमी के चलते उनकी स्थिति संकटपूर्ण हो गई है।
आम तौर पर इन श्रमिकों को लगभग 1200 रुपये में मिलने वाला गैस सिलेंडर अब काला बाजार में चार से पांच गुना अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है। कुछ जगहों पर 2500 रुपये देने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा है। आय सीमित होने के कारण श्रमिकों के लिए यह खर्च वहन करना मुश्किल हो गया है। इस स्थिति में पिछले दो दिनों से सूरत रेलवे स्टेशन और उधना रेलवे स्टेशन पर अपने वतन जाने वाले श्रमिकों की भीड़ देखी जा रही है।