कई राज्यों ने मिलकर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ (शुल्क) के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है। इन राज्यों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को दरकिनार करते हुए अवैध रूप से ये शुल्क लगाए हैं।
राज्यों का आरोप है कि ये नए टैरिफ उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों पर अनावश्यक बोझ डालेंगे। उनका कहना है कि पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध ठहराया था, लेकिन इसके बावजूद नए टैरिफ लगाए गए हैं।
राज्यों के अटॉर्नी जनरल का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है। उनका कहना है कि यह धारा व्यापार असंतुलन को ठीक करने के लिए नहीं, बल्कि मौद्रिक असंतुलन को ठीक करने के लिए बनाई गई थी।
राज्यों का यह भी कहना है कि ये टैरिफ संविधान के शक्ति-विभाजन के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि संविधान के अनुसार शुल्क लगाने का अधिकार संसद के पास है। उनका आरोप है कि ट्रंप प्रशासन ने सभी देशों पर समान रूप से शुल्क नहीं लगाए हैं, जो कि 1974 के व्यापार अधिनियम का उल्लंघन है।
राज्यों का कहना है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बचने का एक प्रयास है। उन्होंने पहले भी ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ के खिलाफ मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्हें सफलता मिली थी।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा है कि प्रशासन अदालत में राष्ट्रपति के फैसले का पुरजोर बचाव करेगा।