ईरान युद्ध में होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) को लेकर घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर नाटो देशों पर भड़क उठे हैं। दुनिया भर में बढ़ रही डीजल-पेट्रोल की कीमतों को लेकर उन्होंने नाटो देशों को जिम्मेदार ठहराया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' पर एक पोस्ट करते हुए नाटो सहयोगियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नाटो देश परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते थे।
ट्रंप ने 'ट्रूथ सोशल' पर पोस्ट किया, 'अमेरिका के बिना नाटो (NATO) सिर्फ एक कागजी शेर है! वे परमाणु शक्ति वाले ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते थे। अब जब वह लड़ाई सैन्य रूप से जीत ली गई है, और उनके लिए खतरा बहुत कम है, तो वे तेल की ऊंची कीमतों के बारे में शिकायत करते हैं, लेकिन 'होर्मुज जलसंधि' खोलने में मदद नहीं करना चाहते। यह एक सरल सैन्य अभ्यास है जो तेल की ऊंची कीमतों का एकमात्र कारण है। उनके लिए यह करना बहुत आसान है और इसमें जोखिम भी बहुत कम है। ये लोग डरपोक हैं और हम इसे याद रखेंगे! - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप'
नाटो क्या है?
नाटो 1949 में बना एक सैन्य गठबंधन है। इसमें अमेरिका, कनाडा और कई यूरोपीय देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य सामूहिक रक्षा है। यदि नाटो के किसी एक सदस्य पर हमला होता है तो उसे सभी पर हमला माना जाता है। वर्तमान में 30 से अधिक देश हैं जो सुरक्षा और सहयोग के लिए एक साथ काम करते हैं।