वैज्ञानिक सम्मेलनों में हास्य का स्तर हमेशा से एक दिलचस्प विषय रहा है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह जानने की कोशिश की गई कि क्या वैज्ञानिक अपने प्रस्तुतियों में हास्य का प्रयोग करने में सफल होते हैं या नहीं।
अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश वैज्ञानिक सम्मेलनों में हास्य के प्रयास या तो शांत चुप्पी में डूब जाते हैं या फिर कुछ हल्की मुस्कुराहटों तक ही सीमित रहते हैं। केवल 9% प्रयास ही ऐसे रहे जो दर्शकों को हंसाने में सफल रहे। सबसे ज्यादा हंसी तकनीकी गड़बड़ियों पर आई, जैसे स्लाइड का खराब होना या माइक का बंद हो जाना।
हालांकि, यह सच है कि किसी भी मंच पर हास्य का प्रयोग करना मुश्किल होता है, खासकर जब दर्शक पहले से उत्साहित न हों। लेकिन, अध्ययन में यह भी पाया गया कि जो वैज्ञानिक हास्य का प्रयोग करते हैं, उनकी बातें अधिक यादगार होती हैं।
एक चिकित्सक-वैज्ञानिक ने बताया कि सम्मेलनों में इतनी दिलचस्प सामग्री होने के बावजूद, ध्यान केंद्रित रखना मुश्किल हो सकता है। हास्य का प्रयोग प्रस्तुतियों को अधिक आकर्षक और यादगार बनाने का एक तरीका हो सकता है। इसलिए, वैज्ञानिकों को अपने प्रस्तुतियों में हास्य का प्रयोग करने से डरना नहीं चाहिए, भले ही उन्हें हमेशा सफलता न मिले।